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बाटी चोखा के सेवन के आयुर्वेद के लिहाज से भी हैं यह फायदे…

जंक  फ़ूड के दौर में भी पारम्परिक व्यजनों के स्वाद का कुछ ऐसा रिश्ता है की लोगों को अपने करीब खींच लाता है, ऐसे में बनारस का जिक्र हो  बाटी -चोखा का नाम न आये तो यह बनारस के स्वाद से बेमानी होगी. बनारस के व्यंजनों में प्रसिद्ध बाटी चोखा के स्वाद का कुछ कमाल ही ऐसा है कि प्रातः काल से शाम तक दुकानें सजी ही रहती हैं.
 
कैसे तैयार होता है बाटी चोखा
 
इस व्यंजन को भरपूर स्वाद देने के लिए अच्छे कारीगरों द्वारा तैयार किया जाता है. जैसे बाटी में चने का सत्तू ,अजवाइन ,अमचुर ,जीरा मरीच,सरसो ऑयल आचार नीबू का रस आदि मिलाकर तैयार किया जाता है  इसे कोयले या उपली के आंच पर पकाया जाता है. इसी तरह चोखा बनाने के लिए ,आलू ,बैगन टमाटर ,को पकाकर इसमें अदरक लहसन धनिया ,मिर्च, सरसो ऑयल आदि लजीज सामग्री मिलाकर तैयार किया जाता है.
 
स्वाद का चटपटा संगम है यह बाटी-चोखा
 
इस बाटी को मक्खन में डुबोकर चोखा के साथ आचार सलाद आदि स्वादिष्ट चीजों से सजाकर लोगो को परोसा जाता है, स्वाद का ऐसा मिलावट लोगो को खाने तो क्या उँगलियाँ चाटने को भी विवश कर देगी. मजे की बात ये है कि बनारस की बाटी एक बार जो भी खता है वो इस लजीज स्वाद का फैन बन जाता है.
 
आयुर्वेद के लिहाज से भी हैं फायदे
 
बाटी-चोखा भून कर पकाया जाता है इसमें सभी चीजें स्वाद के साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकरी होती है जिससे लोगों की भूख तो मिटती ही है ,पर स्वास्थ्य पर किसी भी तरह का बुरा असर नहीं पड़ता ,इस भोजन में मिलायी जाने वाले सभी चीजें आयुर्वेद के लिहाज से लाभप्रद होती है जिसकी वजह से भी लोग इस खाने को खूब पसन्द करते हैं.
 
गांव के भोजन ने ले लिया मार्केट का रूप
 
इस बाटी चोखा की आरंभ बहुत वर्ष पहले  उत्तर हिंदुस्तान के गॉवों से हुई थी,पर इसके चटपटे स्वाद का रस लोगों के जुबान पर ऐसा लगा की आज बाटी-चोखा ने अपनी स्थान शहर बाजार, बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में बना ली प्राकृतिक ढंग से बनाये जाने के कारण यह व्यंजन लोगों को खूब भा रहा है.
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