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दूध में बर्फ मिलाने से कम होती है दूश की गुणवत्ता और स्वास्थ्य के लिए है हानिकारक

ठंडी जगहों पर बर्फ आसमान से गिरती है, लेकिन सोचिए यदि बर्फ आपके दूधवाले के केन में गिरे? जी हां, यह हकीकत है. शहरभर की दूध मंडियों में दूध के केन में सिल्ली वाली बर्फ मिलाना एक ट्रेंड सा हो गया है. इससे दूध की गुणवत्ता तो कम होती है. साथ ही आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है.  

ग्रंथों में शुद्ध स्वास्थ्य वर्धक  तंदुरूस्ती की मिसाल बोला जाने वाला दूध अपने साथ कई बीमारियों घर लाता है. सर्दियों के मौसम में बर्फ डालकर दूध बेचा जा रहा है. यह गुणवत्ता के साथ बीमारी को बढ़ावा दे रहा है. वहीं, बर्फ की आड़ में बासी दूध भी बेच दिया जाता है.

मौके पर उपस्थित एक सूत्र ने बताया कि यह कार्य बहुत ज्यादा दिनों से किया जा रहा है. दूध में बर्फ फ्रिज का कार्य करती है. दूध को ठंडा रहने से देर तक बेकार नहीं होता है. बिक्री बढ़ाने  नुकसान को कम करने की चाह में ऐसी मिश्रण को अंजाम दिया जाता है.


शिशुओं के आहार पर पड़ता है खास असर  
मिलावटखोरों कि इस तरह की हरकत का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है. अधिक पैसा चुकाने के बाद भी बच्चों के ज़िंदगी के साथ ऐसा खिलवाड़ किया जा रहा है. मिलावटी दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ पर खासा प्रभाव पड़ता है. कई केसों में देखा गया है कि बच्चा जब मां का दूध नहीं पीता तो उसे गौ माता का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है.

बताते चलें कि राजधानी में बर्फ फैक्ट्री में प्रयोग होने वाले पानी की क्वालिटी बहुत बेकार होती है. बर्फ बनने वाली फैक्ट्रियों में प्रदूषित जल का उपयोग किया जा रहा है. इसके सेवन से पीलिया, डायरिया, डिसेंट्री  टायफाइड जैसी खतरनाक बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

डॉक्टर देते हैं संभल के इस्तेमाल करने की सलाह
डायटीशियन किरण शर्मा ने बताया कि गंदगी युक्त बर्फ दूध में प्रयोग करने से निमोनिया को बढ़ावा मिलता है. साथ ही पाचनतंत्र भी प्रभावित होता है. इसके कारण डायरिया, दस्त, कोलाइटिस  उल्टी भी हो सकती है. कई दिनों तक गला भी बेकार होने कि सम्भावना है. गौरतलब है कि हाल ही में एम्स इण्डिया की सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में हर 100 में से 30 लोगों को पेय पदार्थों में बर्फ प्रयोग करने से नुकसान पहुंचता है. 

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